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Archive for the ‘festival’ Category

आज के दिन ही 1008 भगवान आदिनार्थ को गन्ने का आहार 6 माह बाद आहार की विधि मिली

आज  ही के दिन माँ गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था ।

महर्षी परशुराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था ।

माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था 

द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था ।

कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था ।

कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था ।

सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था ।

ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था ।

प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोला जाता है ।

बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रह चरण के दर्शन होते है अन्यथा साल भर वो बस्त्र से ढके रहते है ।

इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था ।

अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ किया जा सकता है

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करवा   चौथ

करवा   चौथ   का   त्योहार 

लाए   ख़ुशियाँ   हजार 

हर   सुहागिं   के   दिल   का   

ये   अरमान   है 

प्यारे   पिया   में   बसी   

उसकी   जान   है 

पिया   के   लिए   ही   

व्रत   करती   है   वह 

उसके   नाम   से   ही 

  अपनी   माँग   भारती   है   वह 

पिया   की   दीर्घायु   के   लिए 

करती   है   दुआ 

भूखी – प्यासी   रहती   है 

बस   चाहती   है   पिया 

पिया   ही   तो   उसकी   ख़ुशियों 

का   संसार   है 

आज   प्यारा   पिया   

का   ही   दीदार   है 

चाँद   फीका   लगे   

पिया   चाँद   के   आगे 

और   चाँद   से   ही   पिया   की   

लंबी   आयु   मांगे 

बस   भावुकता   से   यह 

ओत – प्रोत   है 

प्यारा   प्यार   का   त्योहार 

यह   करवा   चौथ   है

by Sima Sach

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Krishna Janmashtami falls on Saturday, September 5, this year. It marks the birth of Lord Krishna – the most attractive male in the universe. 

In the Hindu tradition God in his virat roop is considered incomprehensible to the five senses. He therefore as an act of mercy enables his worship through murtis that are installed as per the prescriptions of the shastras. He is worshipped through the listening of his leelas and glorification of his names. May we live, breathe, sing, dance and behave in ways that are pleasing to the Lord of the Gopis! 

Welcome into our hearts O Lord Gopijana-Vallabha! 

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